108 दिन, 86 हजार से ज्यादा जिंदगियां: छत्तीसगढ़ की '108 संजीवनी एक्सप्रेस' बनी आपातकाल में उम्मीद की नई पहचान
'108 संजीवनी एक्सप्रेस'* ने सिर्फ 108 दिनों में ही आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की इस पहल ने प्रदेश में समय पर इलाज और जीवनरक्षा को नई गति दी है।
108 दिन की बड़ी उपलब्धियां
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से चल रही इस सेवा के आंकड़े खुद इसकी सफलता बता रहे हैं:
- 2.96 लाख से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त
- 86,500 से अधिक मरीजों तक एम्बुलेंस पहुंची
- 100% मामलों में समयबद्ध प्रतिक्रिया
- 6,500 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित मदद
- 5,000 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया
- 5,300 हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मरीजों को "गोल्डन ऑवर" में उपचार केंद्र तक पहुंचाया
- 174 नवजात और शिशुओं को विशेष चिकित्सा सहायता
क्या है खास इस नई 108 में?
1. तेज रफ्तार: शहरी क्षेत्र में औसत प्रतिक्रिया समय 12 मिनट और ग्रामीण में 18 मिनट
2. आधुनिक बेड़ा: राज्यभर में 375 एम्बुलेंस - 300 BLS, 70 ALS और 5 स्पेशल ALS Neonatal एम्बुलेंस
3. ट्रेंड टीम: हर एम्बुलेंस में प्रशिक्षित EMT और पायलट, जो अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्राथमिक उपचार शुरू कर देते हैं
4. टेक्नोलॉजी: GPS ट्रैकिंग, डिजिटल डिस्पैच सिस्टम और 24x7 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से निगरानी
5. सबके लिए: दूरस्थ आदिवासी अंचलों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक 3.11 करोड़ की आबादी को कवरेज
विभाग के अनुसार 108 का उद्देश्य सिर्फ मरीज को अस्पताल पहुंचाना नहीं, बल्कि "गोल्डन ऑवर" के भीतर जीवनरक्षक मदद देना है। इसी वजह से हजारों गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकी।
अधिकारियों का बयान
108 दिन पूरे होने पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी EMT, पायलट और ERC टीम को बधाई दी। अधिकारियों ने कहा कि "108 संजीवनी एक्सप्रेस" केवल एक सेवा नहीं, बल्कि सरकार की नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य नीति और प्रतिबद्धता का उदाहरण है। आगे भी सेवा की गुणवत्ता और त्वरित प्रतिक्रिया को और बेहतर किया जाएगा।
सड़क हादसे से लेकर प्रसूति और हार्ट अटैक तक - हर आपात स्थिति में 108 अब छत्तीसगढ़वासियों के लिए भरोसे का पर्याय बन चुकी है।


